कहानियां और किस्से

वो कहानी था चलता रहा, मै किस्सा थी ख़त्म हो गयी |
वो कहानी था जिसमे अनेको किरदार थे, मै किस्सा थी जिसमे दो ही अदाकार थे ||

कहानी बन मेरी किताब का, हर रोज़ उसे पढ़ती हूँ मैं |
किस्सा बन के दिन का, शाम होते ढल जाती हूँ मैं ||

उसकी कहानियां हर रात सुनती हूँ मैं, मेरा किस्सा तो उसी रात ख़त्म हो गया |
हम मिल जाते तो शायद कहानी बनती, हम ना मिले तभी तो किस्सा रह गया ||

Leave a comment