मेरी सहेली

अपनी दुखों को भी हसी में उड़ा जाती है वो
थोड़ी जिद्दी है मेरी दोस्त
गलती मेरी रहती फिर भी मनाने आ जाती है वो

कभी कोई पंक्तियाँ लिख दूँ
तो हज़ारों सवाल कर जाती है वो
अगर जवाब न दूँ मैं
तो फिर आंसूं निकाल भावुक हो जाती है वो

मेरे पहले प्यार पे
जाने क्यों उसकी मंजूरी ना थी
मगर जब कमज़ोर होते मेरे रिश्ते
तो फिर सुलझाने लग जाती है वो

नाचना गाना तो भाता ही है
बस दर्शकों की खोज मेँ रहती है वो
मेरी तालियों की गूंज ना सुनाई दे
तो दोबारा मंच पर चढ़ जाती है वो

थोड़ी लड़ाकू है मेरी दोस्त
मुझसे लड़ने का मौका भी न छोड़ती है वो
सबसे अच्छा दोस्त कहे कोई
तो उससे भी लड़ जाती है वो

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