इन पहाड़ों में, इन हवाओं में
कहाँ ढूंढूं तेरी हंसी, तेरी वो ख़ुशी
गर खुदा के पास भी मिल जाए तेरी मुस्कुराहट
कर लुंगी ज़िन्दगी से मैं वो सौदा भी
ले चल उस खुदा के पास एक दफा मुझे
जिसने बनायीं तेरी सूरत, तेरी ये मूरत
भूल गया वो जाने क्यों तेरी हसी की जरूरत
तू ना जाने, ना जाने कोई
जब जब है मुस्कुराता तू, धड़कन है थम जाती क्यों
बता ऐ खुदा गर तू ना लौटा सके उसे
छीन लाऊंगी कही से, या दे दूंगी अपनी ख़ुशी
बस दुआ है इतनी ऐ ज़िन्दगी, चुरा ना लेना तू उसे मुझसे कहीं
Na jeena na paana na mila wo jine ka afsana agar mila woh dastak-e-mulzim kya bhul jaegi jeena tu.. phr mile na mile woh kadam jise soch k tu chali thi phr soch le ae nadaan kis gali hai chali tu..
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